अमेजन में रहने वाली दुर्लभ जनजाति हो गई विलुप्त, जंगल में मृत मिला आखिरी सदस्य! खुला चौंकाने वाला राज
अमेजन में रहने वाली दुर्लभ जनजाति हो गई विलुप्त, जंगल में मृत मिला आखिरी सदस्य! खुला चौंकाने वाला राज


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आप ये तो जानते ही होंगे कि सदियों पहले इंसान जंगलों में ही रहता था. उनकी अलग-अलग जनजातियां होती थीं. जैसे-जैसे वक्त बदला, इंसान आधुनिक होता गया, उसने शहरों का निर्माण किया और उसके तौर तरीके पूरी तरह बदल गए. 21वीं सदी में जहां अधिकतर लोग शहरों में रहते हैं वहीं आज बहुत कम ऐसे इंसान रह गए हैं जो जंगलों में जनजातियों (tribes on Amazon rainforest) के रूप में रहने लगे हैं. ब्राजील में स्थित अमेजन के जंगलों (Amazon rainforest, Brazil) में कई जनजातियां एक वक्त में पाई जाती थीं मगर अब अधिकतर विलुप्त होने के कगार पर आ चुकी हैं. हाल ही में एक जनजाति विलुप्त (tribe extinct in Amazon) हो गई क्योंकि उसके आखिरी सदस्य की मौत हो गई.

डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार अमेजन रेन फॉरेस्ट में रहने वाली एक जनजाति पूरी तरह विलुप्त हो गई क्योंकि उसका आखिरी सदस्य (final member of tribe died in Amazon rainforest) हाल ही में मृत मिला है. इस जनजाति से कभी बाहरी लोगों का कोई संपर्क नहीं रहा और ये ब्राजील में रहा करती थी. इन जनजाति के आखिरी सदस्य को ‘मैन ऑफ द होल’ (Man of the outlet) कहा जाता था. वो अकेले 26 सालों तक तनारू आइलैंड पर रहा करता था. ब्राजील की के जंगलों की सुरक्षा करने वाली एक एजेंसी फुनई ने ये नाम उस आदिवासी को दिया था क्योंकि वो जंगल में गड्ढा खोदकर जानवरों को उसमें फंसाता था और फिर शिकार करता था.

इस झोपड़ी में रहा करता था शख्स. (Caters News Agency through Daily Star)

1996 में पहली बार दिखा था शख्स
रिपोर्ट की मानें तो उस शख्स को सबसे पहले साल 1996 में देखा गया था. उससे संपर्क साधने के लिए काफी कोशिशें की गईं, खाने का पार्सल रखा गया मगर वो शख्स कभी उसे नहीं अपनाता था. 23 अगस्त को शख्स की लाश एक झोपड़ी में मिली जिसमें वो रहा करता था. माना जाता है कि जनजाति के अन्य सदस्य 80 के दशक तक मर चुके थे. दावा किया जाता है कि मवेशी पालने वाले रैंचर्स ने जमीन की लालच में बड़ी संख्या में इस जनजाति के लोगों को मार डाला था.

खुला बड़ा राज
जानकारों ने जनजाति के आखिरी सदस्य को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है जिससे मुमकिन है कि बड़ा राज खुल गया है. उन्होंने बताया कि शख्स को अपनी मौत के बारे में पहले से पता था, क्योंकि लाश के हाथ में मकाऊ तोते का पंख था. उस जनजाति में ये प्रथा थी कि मरते वक्त लाश के हाथ में तोते का पंख रखा जाता था. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि उस जनजाति का ना ही लोगों को नाम पता था और ना ही वो क्या भाषा बोलते थे, इसके बारे में कोई जानकारी थी. पुलिस ने जांच में पाया कि उसकी लाश के पास किसी भी तरह के हिंसा कोई निशान नहीं थे. ऐसे में हत्या की संभावना को खारिज कर मौत प्राकृतिक कारणों से बताई जा रही है. हालांकि, अब पुलिस लाश की फॉरेन्सिक जांच करेगी.

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