‘काला चश्मा’ पर सुने होंगे आपने सैकड़ों गाने, आखिर कब और किसने पहने थे पहली बार सनग्लासेज़?
‘काला चश्मा’ पर सुने होंगे आपने सैकड़ों गाने, आखिर कब और किसने पहने थे पहली बार सनग्लासेज़?


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Who Invented Sunglasses: कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं, जिनका आविष्कार जब हुआ होगा, तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि ये इतना ज्यादा लोकप्रिय होने वाला है. ऐसी ही कुछ एसेसरीज़ में से एक है -धूप से बचाने वाला काला चश्मा या फिर शेड्स या सनग्लासेज़. नाम आप कोई भी ले लें, ये ऐसी एसेसरी है, जो ज़रूरत भी है और शौक भी. बॉलीवुड में भी सैकड़ों गाने इस अकेली चीज़ पर बन चुके हैं और मज़े की बात ये है कि इन्हें पसंद भी खूब किया गया.

चश्मों के आविष्कार को लेकर तो काफी ज्यादा कनफ्यूज़न है. बताया जाता है कि नज़र के चश्मे का आविष्कार 13वीं सदी में 1282 से 1286 के बीच हुआ था. एनसाइक्लोपीडिया के मुताबिक चश्मे के आविष्कारक के तौर पर इटली के अलैसेंद्रो डि स्पिना और सल्विनो डिली आर्म्टी का नाम लिया जाता है. फिर भी ज्यादातर जगहों पर अलैसेंद्रो डि स्पिना को ही इसका आविष्कारक माना गया, जबकि आर्म्टी के योगदान को कभी नकारा नहीं गया.

रंगीन चश्मे आखिर कब बनाए गए?
धूप के चश्मे या रंगीन चश्मों की बात की जाती है तो माना जाता है कि इसे 12वीं सदी में चीन में सबसे पहले बनाया गया था. ये एक तरह के पारदर्शी पत्थर को स्मोक करके बनाया जाता था, जो सूरज की किरणों को रोकता था. इसका फ्रेम कुछ खास नहीं होता था, लेकिन ये सिर्फ बेहद अमीर लोग ही अफोर्ड कर पाते थे. ज्यादतर इसे चीन के जजेज़ इस्तेमाल करते थे, ताकि दूसरे से बात करते वक्त उनकी भावनाएं दिखाई नहीं दें. फिर सन् 1430 के आसपास नज़र के चश्मों को ही गहरे रंग का बनाकर चीन से इटली में इंट्रोड्यूस किया गया.

माना जाता है कि इसे 12वीं सदी में चीन में सबसे पहले बनाया गया था.

20वीं सदी तक फैशन बन गए चश्मे
18वीं सदी में James Ayscough ने नज़र के चश्मों के लेंस को रंगीन बनाना शुरू किया. हालांकि ये धूप से बचाने के लिए नहीं था, बल्कि वे इसके ज़रिये आंखों की रोशनी ठीक करने का दावा करते थे. वे लेंस को नीला और हरे रंग का टिंट देते थे. 20वीं सदी आते-आते मॉडर्न चश्मे आने लगे, जो काले रंग थे. हॉलीवुड स्टार्स इन्हें पहनकर निकलने लगे. 1929 तक Sam Foster की कंपनी ने बड़ी संख्या में चश्मों का उत्पादन शुरू किया. 1930 के दशक तक चश्मे हर रेंज में उपलब्ध होने लगे. आर्मी और एयरफोर्स के लिए भी खास धूप के चश्मे बनाए गए, जिसमें पीला रंग भी आने लगा. द्वितीय विश्व युद्ध तक मशहूर एविएटर एंटी ग्लेयर ग्लासेज़ आ चुके थे. वहीं 1960-70 के दशक तक तो सनग्लासेज़ का क्रेज़ पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा था.

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