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Drinking Water Shortage : धरती का ज्यादातर 70 फीसदी हिस्सा पानी से ढका हुआ है, लेकिन मुश्किल ये है कि इसमें से 97 फीसदी हिस्सा सागरों और महासागरों में भरा हुआ है. ये खारा और नमकीन पानी पीने के काम नहीं आ सकता है. ऐसे में बहुत थोड़ा हिस्सा ऐसा है, जो नदियों, झीलों और तालाब में है, जिसे पिया जा सकता है. ऐसे में धरती पर बढ़ती जनसंख्या और सूखते जलाशयों के बाद पीने के पानी पर खतरा मंडरा रहा है.

यूं तो दुनिया के तमाम देशों में लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है, पानी की कमी को लेकर ब्रिटेन की पर्यावरण एजेंसी का कहना है कि लोगों को सीवर के पानी को रिसाइकिल करके पीने की आदत डालनी होगी वरना अगले 20 साल में लोग प्यास के मारे तड़पने लगेंगे. ये सुनने में भले ही अजीब है लेकिन टॉयलेट में बर्बाद होने वाले पानी को रिसाइकिल करके पीना विशेषज्ञों के मुताबिक ज़रूरी हो चुका है.

टॉयलेट से सीधा नल तक पहुंचेगा पानी
पर्यावरण एजेंसी के चीफ सर जेम्स बेवन का कहना है कि हमें पानी के मामले में नखरों से बचना होगा क्योंकि पानी तेज़ी से कम होता जा रहा है. हम अगर इसी तरह टॉयलेट में फ्लश का पानी बहाते रहे तो 20 साल में ही पीने के पानी की कमी हो जाएगी. अब ब्रिटेन की वॉटर फर्म्स टॉयलेट से टैप तक पानी पहुंचाने की प्लानिंग कर रहे हैं. इसके ज़रिये टॉयलेट, सिंक और बाथटब से निकलने वाले पानी को रिसाइकिल करके पीने के योग्य बनाया जाएगा. इस वक्त ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति है, जिसकी वजह से पर्यावरण के विशेषज्ञ चिंतित हैं.

पानी में नहीं होगी कोई बुराई
Sir James के मुताबिक हमें ये सोचना बंद करना होगा कि पीने के पानी का सोर्स क्या है. सीवेज ट्रीटमेंट के बाद जो पीने का पानी आएगा, वो बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित होगा. डेली स्टार के मुताबिक वैज्ञानिकों की योजना है कि इस तरह नदियों और अन्य जलाशयों पर प्रेशर कम होगा. कई कंपनियां वेस्ट रिसाइक्लिंग स्कीम पर काम शुरू कर चुकी हैं. साल 2025-2030 तक इन्हें इस्तेमाल में लाया जा सकेगा. Cranfield Water Science Institute के डॉक्टर हीथर स्मिथ बताते हैं कि कुछ गंदे पानी को साफ करके नदियों डाला जा चुका है, लेकिन सीवेज वॉटर को लेकर काम चल रहा है.

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