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बच्चा जैसे ही बड़ा होने लगता है, पैरेंट्स की पहली चिंता होती है कि उसे स्कूल में दाखिला दिलाया जाए, जहां पढ़ाई लिखाई बहुत अच्छी हो. हिन्दी, गणित, अंग्रेजी और खेल-कूद का लेवल अच्छा है. लेकिन क्या कभी किसी को बच्चे के लिए ऐसी शिक्षा की तलाश और डिमांड करते देखा गया है जहां बच्चा नैतिकता और सामाजिकता सीखे, और सबसे बढ़कर इंसानियत और शिष्टाचार का पाठ अच्छे से पढ़े. नहीं, इसीलिए स्कूल भी खुद को इसके लिए बाध्य नहीं मानते, लेकिन ये सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है.

स्कूल में बच्चों को किताबी ज्ञान के अलावा इंसानियत और नैतिकता की शिक्षा देना भी उतना ही ज़रूरी होता है जितना की बाकी विषय का. ट्विटर पर @TheFigen के अकाउंट पर शेयर एक वीडियो बेहद पसंद किया जा रहा है जहां क्लासरूम में बच्चों को बस में ट्रैवेल के दौरान ज़रूरतमंद को देखते ही उनकी मदद का पाठ पढ़ाया जा रहा था. वीडियो को 10 लाख से ज्यादा व्यूज़ मिले. जिसे कैप्शन दिया गया– ‘दिस इज़ ग्रेट एजुकेशन’

स्कूल में मिली ऐसी शिक्षा देखने वालों ने की जमकर सराहना
सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जहां स्कूल के क्लासरूम में बच्चों को सामाजिक समझ का ज्ञान देते दिखाया गया. बस में ट्रैवेल करते पैसेंजर्स और ज़रूरतमंदों के ज़रिए इंसानियत और शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया गया. छोटे-छोटे बच्चे एक काल्पनिक बस में ट्रैवेल कर रहे थे, जहां एक-एक कर कुछ ज़रूरतमंद बस में सवार होते हैं, जिनके लिए स्वस्थ लोगों को अपनी सीट छोड़कर उन्हें दे देनी चाहिए. जैसे पहले एक बुज़ुर्ग ने एंट्री की, फिर गोद में बच्चा लिए महिला आई और फिर एक गर्भवती महिला ने बस में प्रवेश किया. बारी-बारी से कई लड़कों ने इन सभी के लिए अपनी सीट छोड़ी और उन्हें जगह दी. एक्ट में हर रोल बच्चे ही निभा रहे थे. मकसद साफ था, उन्हें घर और स्कूल के बाहर की दुनिया में रहना और सलीका सिखाना जो कई बार किताबी ज्ञान से कहीं ज्यादा ज़रूरी हो जाता है.

किताब के साथ-साथ पढ़ाईए शिष्टाचार का पाठ
बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, इसीलिए बचपन में जो सीख दे दी गई, वो ताउम्र साथ रहती है. लेकिन जिसके लिए और बड़े होने या फिर खुद सीख जाने का इंतजार किया गया, वहां अक्सर मात ही खाने को मिलती है. इसलिए बेहद ज़रूरी है कि अपने बच्चों के पढ़ाई-लिखाई पर जी जान लुटाने के साथ ज़री उन्हें जीवन जीने का तरीका, सामाजिकता औऱ शिष्टाचार भी उतनी ही अहमियत देकर सीखाया पढ़ाया जाए. क्योंकि बच्चे भविष्य की नींव होते हैं और उन्हें मजबूत करने की ज़िम्मेदारी हम सब की है. बच्चे जितनी अच्छी बातें सीखेंगे उतना ही हमारे लिए भी अच्छा होगा.

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