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अमेरिकी भू वैज्ञानिक सात साल लंबे ग्रहण के अंत की वजह जानने की कोशिश कर रहे थे तभी इस दुर्लभ दृश्य से रूबरू हुए. वाशिंगटन विश्वविद्यालय के खगोलविदों ने देखा कि दूर एक तारा जो काफी मंद नजर आ रहा था वह अचानक चमकने लगा.अगले ढाई साल में वह काफी तेज चमक बिखेरने लगा. जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि यह तारा कभी कभार ही नजर आता है और वह भी तमाम शोधकर्ताओं को नजर नहीं आता. इससे वैज्ञानिक मान बैठे थे क‍ि यह काफी दूर होगा इसल‍िए इसकी चमक मद्धम थी. पर कहानी कुछ और निकली.

साथी की वजह से चमक खोई
शोधकर्ताओं ने इसे गैया17बीपीपी (Gaia17bpp) नाम दिया और समझाया कि यह क्‍यों नजर नहीं आ रहा था. बताया कि इस तारे का धुंधला दिखना अंतर‍िक्ष में किसी आंतरिक परिवर्तन की वजह से नहीं बल्कि तारे के एक साथी की वजह से है. यह साथी धूल का गुबार लेकर आता है और इस तारे को चारों ओर से घेर लेता है. यानी एक तरह से उस तारे पर ग्रहण लग जाता है.

दुर्लभ नजारा देखा
खगोलविदों ने बताया कि दोनों तारे करीब एक हजार साल से अपनी कक्षा में भ्रमण कर रहे हैं और एक दूसरे की पर‍िक्रमा करते रहते हैं. शोधकर्ता अनास्तासियोस तज़निदाकिस ने कहा, हम मानते हैं कि यह तारा असाधारण रूप से दुर्लभ प्रकार के बाइनरी सिस्टम का हिस्सा है. यह एक बड़े, फूले हुए पुराने तारे – Gaia17bpp- और एक छोटे साथी तारे के बीच, जो धूल भरी सामग्री की विशाल डिस्क से घिरा हुआ है. जब हमने 2012 और 2019 के बीच रहे ग्रहण की पड़ताल की तो इस दुर्लभ नजारे को देखा. शोधकर्ताओं ने तो यहां तक दावा किया कि व्हाइट ड्वार्फ से निकलने वाली धूल हमारे सौर मंडल में सूर्य और पृथ्वी के बीच की जगह को भरने के लिए भी काफी है.

तारों की जोड़ी कैसे बनी
त्ज़निदाकिस ने कहा, यह अभूतपूर्व खोज थी. 66 वर्षों के इतिहास में हमें इस तारे के मंद होने के कोई अन्‍य संकेत नहीं मिले थे. अगर हम कुछ साल बाद इसकी छानबीन करते तो शायद यह नजर भी नहीं आता. यदि ऐसा है, तो हमें इसकी तलाश करनी होगी क‍ि तारों की यह जोड़ी कैसे बनी.

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